DD NEWS

.

ZEE NEWS

.

Saturday, July 4, 2009

Hindi-interesting News-inf. by Ashok Hindocha (M-9426201999)


www.bsnlnewsbyashokhindocha.blogspot.com
श्रीनगर। 'जानम स्ट्राइक करो', 'हुर्रियत आई तुम न आए', 'कहो न हड़ताल है', 'हम हाउस अरेस्ट हो चुके सनम', 'कभी स्ट्राइक तो कभी प्रोटेस्ट', 'आ अब ईदगाह चलें', 'शहीद तो होना ही था'।

यह चंद नाम उन फिल्मों के है जो कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी को फिल्म बनाने का मौका मिलने पर होंगे। इस संदेश के साथ कश्मीर में इन दिनों यह एसएमएस उन लोगों में खूब लोकप्रिय हो रहा है जो अलगाववादियों के रोज-रोज के बंद के आह्वान और हिंसक प्रदर्शनों से आजिज आ चुके हैं। इन लोगों के लिए कल का रहबर-ए-इंकलाब आज का हड़ताली चाचा और गिल्ली अंकल बन चुका है।

गौरतलब है कि कटं्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी को हिजबुल मुजाहिदीन और आम कश्मीरी अवाम रहबर-ए-इंकलाब [क्रांति का नेता] मानते है। अलबत्ता, जिस तरह से बीते एक साल के दौरान कट्टरपंथी नेता ने हड़ताल करते हुए कभी लाल चौक चलो तो कभी शोपियां चलो का आह्वान किया है, उससे उनकी साख पर असर होने लगा है। रोज-रोज की हड़ताल से परेशान छात्र, पत्रकार, दिहाड़ीदार व अन्य लोग अब उन्हे अलग-अलग नामों से पुकारने लगे हैं।

कश्मीर में एक वर्ग उन्हे हड़ताली चाचा कहता है, इसका पता दैनिक जागरण को उस समय लगा जब एक पत्रकार ने पुलिस वाले से पूछा कि हड़ताली चाचा कहां है? अस्पताल में भर्ती है या वापस चश्मा शाही में आराम फरमा रहे है। जब उक्त पत्रकार से पूछा गया कि यह हड़ताली चाचा कौन है तो उसने कहा कि अपने गिलानी साहब और कौन। एक वही तो है जिनके कहने पर कश्मीर में हड़ताल होती है और लोग चाहकर भी इसका विरोध नहीं करते। वह जब चाहे कश्मीर में दुकानें, स्कूल, गाड़ियां सबकुछ बंद करा सकते है। वह किसी को भी हड़ताल का हुक्म दे सकते है।

बस शुक्र करो कि अभी तक उन्होंने हवा को कश्मीर में बंद होने के लिए नहीं कहा है। गिलानी का 'हड़ताली चाचा' नाम नौकरीपेशा और दिहाड़ीदारों से लेकर वाहन चालकों में खूब लोकप्रिय है। वहीं, स्कूल जाने वाले बच्चों में वह छुट्टी कराने वाला चाचा के नाम से जाने जाते है। शहर के छत्ताबल इलाके में रहने वाले एक स्कूली छात्र ने अपने घर के बाहर गिलानी का पोस्टर देखकर कहा कि यह छुट्टी वाले चाचा की तस्वीर यहां कैसे है। क्या वह हमारे मोहल्ले में आ रहे है। उक्त छात्र की बड़ी बहन, जो कश्मीर विश्वविद्यालय की छात्रा है, ने जब उसे डांटा कि ऐसा नहीं कहते तो दूसरी कक्षा के छात्र ने जवाब दिया कि हमारे स्कूल में तो सभी इन्हे छुट्टी वाले चाचा के नाम से ही पुकारते है।

गिलानी की हड़ताली सियासत से परेशान कश्मीर के एक रंगकर्मी ने अपना नाम न छापे जाने की शर्त पर एक एसएमएस पढ़ाया, जिसमें लिखा था कि अगर गिलानी साहब को फिल्म बनाने का मौका मिले तो उनकी फिल्मों के नाम यूं होंगे: 'जानम स्ट्राइक करो', 'हुर्रियत आई तुम न आए', 'कहो न हड़ताल है', 'हम हाउस अरेस्ट हो चुके सनम', 'कभी स्ट्राइक तो कभी प्रोटेस्ट', 'आ अब ईदगाह चलें', 'शहीद तो होना ही था'।

फारूक शाह नामक एक पत्रकार ने कहा कि हुर्रियत प्रमुख कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी हमारे बुजुर्ग है। लेकिन जिस तरह से वह हड़ताल करा रहे है, उससे वे मुझे गिली-गिली कर जादू दिखाने वाले गिली अंकल लगने लगे है। वह रोज सुबह अपने सामने कश्मीर का नक्शा रखकर गिली-गिली करते हुए उस पर पासा फेंकते होंगे। जहां पासा गिर गया, वहां के लिए चलो आह्वान हो गया या वहां हड़ताल करवा दी।

गिलानी गुट की हुर्रियत के कार्यवाहक चेयरमैन जनरल मूसा से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि लोग तो किसी से भी दिललगी करते रहते है, लेकिन हमें गिलानी साहब का एहतराम करना चाहिए।




ईमेल करेंमैसेंजर के द्वारा भेजेंप्रिंट संस्‍करण

0 comments:

Post a Comment